मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष: मरियम के पर्वों की उत्पत्ति और इतिहास

Ano litúrgico mariano: origem e história das festas marianas

लेखक: · अद्यतन

मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष: एफेसुस में उत्पत्ति, मध्ययुगीन विकास और मरियम के पर्वों का महासभा-उत्तर सुधार।

मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष: प्रस्तावना

मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष कुँवारी मरियम के उन पर्वों और स्मृति-दिवसों का समुच्चय है जो रोमी धर्मविधि-पंचांग में फैले हुए हैं। मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष कोई समानांतर चक्र नहीं है: यह उस एकमात्र धर्मविधि-वर्ष में समाहित है जिसका अक्ष ख्रीस्त का पास्का-रहस्य है, और यह मरियम का स्मरण उन बिंदुओं पर करता है जहाँ उन्होंने इस रहस्य में सहयोग दिया।

I. मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष की उत्पत्ति: एफेसुस (431)

मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष की उत्पत्ति एफेसुस की महासभा (431) और Theotokos की परिभाषा तक जाती है। एफेसुस के बाद पूर्व में मरियम के पर्व बढ़ते गए: निद्रा-पर्व (15 अगस्त), मरियम का जन्म-पर्व (8 सितंबर), मंदिर में समर्पण (21 नवंबर)। पूर्वी मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष ने छठी से आठवीं शताब्दी में पश्चिम को प्रभावित किया।

II. मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष का मध्ययुगीन विकास

मध्य युग में मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष नये पर्वों से समृद्ध हुआ: निष्कलंक गर्भागमन (8 दिसंबर), भेंट (31 मई, पहले 2 जुलाई), मंगल-समाचार (25 मार्च, प्राचीन काल से विरासत में मिला)। मध्ययुगीन मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष में मरियम के शनिवार, प्रतिगान (Alma Redemptoris, Ave Regina, Regina Coeli, Salve Regina) और स्थानीय पर्व भी सम्मिलित होते हैं।

III. त्रेंत के बाद मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष

त्रेंत की महासभा और त्रिदेंतीय पंचांग (पियुस पाँचवें, 1568-1570) ने मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष को सुदृढ़ किया। सोलहवीं और बीसवीं शताब्दी के बीच मरियम का परमपावन नाम (1683), रोज़री की माता (1572), दुःखों की माता (1727), मरियम का निष्कलंक हृदय (1944) जैसे पर्व जोड़े गए। मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष ने महान समृद्धि प्राप्त की।

IV. मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष का महासभा-उत्तर सुधार

महासभा के बाद के सुधार (पौल छठे, 1969 का पंचांग) ने मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष को बाइबिलीय और धर्मशास्त्रीय मानदंडों के अनुसार पुनर्गठित किया। कुछ पर्व हटा दिए गए, कुछ अन्य समाहित कर लिए गए। प्रबोधन Marialis Cultus (1974) ने नये संगठन का सैद्धांतिक आधार दिया। वर्तमान मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष चार महापर्वों पर केंद्रित है: संत मरियम ईश्वर की माता (1 जनवरी), मंगल-समाचार (25 मार्च), स्वर्गोद्ग्रहण (15 अगस्त) और निष्कलंक गर्भागमन (8 दिसंबर)।

V. मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष की आध्यात्मिकता

मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष को जीना है वर्ष भर मरियम के साथ चलना। मरियम-संबंधी धर्मविधि-वर्ष का प्रत्येक पर्व ख्रीस्त के रहस्य की ओर खुलती एक खिड़की है, जिसे माता की आँखों से देखा जाता है। पौल छठे के Marialis Cultus में इसे और गहराई से पढ़ें।

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